सोने दो

दो साल से सब कुछ त्याग
कर रहा था IIT JEE की तैयारी..
इसी ख्वाब में काट लिया समय
के किसी IIT में आजायेगी मेरी बारी…

जिस दिन पेपर देकर आया
हो रहा था बहुत खुश…
अंकों को जोड़-तोड़ कर ही सही
कहीं ना कहीं मिल जाएगा कुछ ना कुछ!

जब रखे अपने पहले कदम
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की भूमी पर..
सोच रहा था पढूंगा ऐसे
जैसे बैठा हो कोई साधू धूनी पर!!

पहला सैमेस्टर बीता बड़ी ख़ुशी से
मार्क्स आये भर-भर कर…
पर अगले सैम में CG की जगह दिखा GC
जैसे चलने लगी हो बुद्धी उलटी घूमकर !!

जब चला मैं CV बनाने..
तब CG गयी डूब..
पर जब दोनों को एक साथ संभाला..
तब जैसे खुद को ही गया मैं भूल!

थे कुछ “सगे” दोस्त मेरे
जिनसे बतियाकर खाली समय बिताता था
पर उनके जाने के बाद मैं
एक गहरी सोच में डूब जाता था..

क्या होगा मेरा?  कैसे करूँ ये सब?
नहीं समझ में आता कुछ !!
औरों की सुन “सफल गाथाएँ”..
खुद को समझने लगा मैं तुच्छ !!

बीत गए हैं ये चार साल
इसी काश-म-काश में…
खली हाथों में एक कागज़ का टुकड़ा लिए…
पाता खुद को विवश मैं !

याद कर चार साल पहले वाले खुद को…
आता अभी अपने पर बहुत तरस !!
कहाँ गयी वो आशाएँ, वो कुछ पाने की ललक ?
और क्यों हैं मेरे चारो तरफ दारू-गांजा-धुआं-चरस!

नहीं संभाल सकता अब मैं और दबाव
जो हो रहा है होने दो…
जागे हुए थक चुका हूँ मैं
अब बस मुझको सोने दो!

Advertisements
Tags:

3 Comments

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s